Thursday, October 21, 2010

एग बिरयानी

सामग्री :
दो कप धुले हुए बासमती चावल (दस मिनट के लिए भिगो दें),
छह अण्डे,
एक पतला कटा प्याज,
दस हरी मिर्ची,
एक तेजपत्ता,
चार लौंग,
आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर,
एक चम्मच पिसा हुआ अदरक व लहसुन,
एक चम्मच पुलाव मसाला,
नमक स्वादानुसार,
दो चम्मच तेल


अण्डों को उबालें और छिलके उतार लें। तेल गर्म करें और उसमेें सारे मसाले मिला दे कुछ सेकण्ड बाद प्याज मिलाएं । हरी मिर्च और पिसा अदरक लहसुन का मिला दें। पूरा मिश्रण भूरा होने तक तलें। अब दो अण्डे फोड़े कर इसमें डालें। धुले हुए चावल इसमें डाले और कुछ मिनट के लिए तलेें। स्वादानुसार नमक मिलाएं। अब उबले अण्डे डालें और चार कप पानी मिलाएं। चावल के आधे पक जाने तक इसे ढक कर रखें। अब इसमें पुलाव मसाला डालें इसके साथ नींबू का रस इसमें छिड़कें । चावल के पकने (पानी सोखने तक) ढक कर रखें । गर्मागर्म परोसें।

5 comments:

Surendra Singh Bhamboo said...

ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

मालीगांव
साया
लक्ष्य

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कृपया अपने ब्लॉग पर से वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा देवे इससे टिप्पणी करने में दिक्कत और परेशानी होती है।

DR. ANWER JAMAL said...

आपका ब्लॉग अच्छा लगा . अल्लाह आपको बनाए लोगों के दुखों में काम आने वाला .
झगड़े की बुनियाद है हिमाक़त
हिन्दुस्तान में दीन-धर्म का झगड़ा सिरे से है ही नहीं।
हिन्दुस्तान में झगड़ा है सांस्कृतिक श्रेष्ठता और राजनीतिक वर्चस्व का। जो इश्यू ईश्वर-अल्लाह की नज़र में गौण है बल्कि शून्य है हमने उसे ही मुख्य बनाकर अपनी सारी ताक़त एक दूसरे पर झोंक मारी। नतीजा यह हुआ कि हिन्दू और मुसलमान दोनों ही तबाह हो गए। तबाही सबके सामने है। इस तबाही से मालिक का नाम बचा सकता है लेकिन आज उसके नाम पर ही विवाद खड़ा किया जा रहा है।
झगड़ा ख़त्म होता है हिकमत से
अल्लाह की हिकमत और नबियों की सुन्नत के मुताबिक़ मैं अपने मुख़ातब की ज़बान में ही बात करता हूं। मुसलमान से बात करता हूं तो उसे मालिक का नाम लेकर उसका हुक्म उसी ज़बान में बताता हूं जिसे वह समझता है और जब हिन्दी-संस्कृत जानने वालों से संवाद करता हूं तो फिर मेरी भाषा बदल जाती है लेकिन पैग़ाम नहीं बदलता।
मेरा अक़ीदा, मेरा मिशन
‘व इन्नल्लाहा रब्बी व रब्बुकुम फ़-अ़-बुदूहू, हाज़ा सिरातुम्मुस्तक़ीम‘

नारदमुनि said...

narayan narayan

खबरों की दुनियाँ said...

अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"

संगीता पुरी said...

इस नए सुंदर से ब्‍लॉग के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!