- बादाम की बारह गुली रात में पानी में भिगो दें। प्रातः छिल्का उतार कर बारीक पीस लें। इसमें एक छटाक मक्खन और थोड़ी सी शक्कर मिलाकर ब्रेड या रोटी के साथ खाएं, ऊपर से एक पाव दूध पिएं। छह महीने लगातार करें, शर्तिया मोटे हो जाएंगे।
- दो मुट्ठी जौ पानी में भिगोएं घंटे बारह के लिए, फिर चारपाई पर कपड़ा फैलाकर कुछ देर उसे खुश्क(सूखने दें) होने दें। फिर इन्हें कूटकर छिलका निकाल दें। बची जौ की गुली से दूध में धीमी आंच पर पकाकर खीर बनाकर खाएं, कुछ सप्ताह में व्यक्ति मोटा हो सकता है।कम से कम तीन माह तक अवश्य।
- जिस तरह से पानी में चने व चावल भिगोने से फूलता है, उसी तरह पतलापन होने पर पानी एवं पानी युक्त पदार्थ अधिक लेने से शरीर भी फूलता है।
- रोज दो केले खाकर ऊपर से एक पाव गर्म दूध पीएं। नित्य तीन महीने तक आप अवश्य मोटे हो जाएंगे। आपके पेट में अधिक अफारा हो तो इसे न लें। यदि थोड़ा पेट भारी हो जाए तो छेटी इलायची खा लें पेट हल्का हो जाएगा।
- नारियल व्यक्ति को मोटा करता है कच्चा नारियल का पानी पियें तथा कच्चा नारियल खायें
- आलू डीप फ्राई करके खाने से वसा बढ़ता है तथा मोटापा बढ़ता है।
- हरी मटर खाने से मांस बढ़ता है साथ ही रक्त भी बढ़ता है, इससे मोटापा बढ़ता है। हाई प्रोटीन का स्त्रोत है
- घी और शक्कर मिलाकर खाने से मोटापा बढ़ता है
- अनार रक्तवर्धक है। रक्त का संचार बढ़ाता शरीर मोटा करता है
- थोड़ी मात्रा में मूंगफली रोज खाएं हाई प्रोटीन का स्त्रोत है
- उड़द की दाल छिलका वाली खाएं, देह को मांसल करता है
- शरीर की नियमित मालिश करें। शरीर मांसल होगा।
- बादाम को रात में पानी में भिगो दें, सुबह महीन पीसकर दूध में डालकर उबालें फिर उसी दूध को पी जाएं।
Saturday, November 13, 2010
मोटापा बढ़ाना है?
नकसीर - नाक से रक्त स्त्राव
बिना किसी संकेत के नाक से रक्त स्त्राव शुरू हो जाता है। नाक से खून बहने को नकसीर कहते हैं,यह विषेशकर गर्मियों के दिनों में होता है कई बार तो कुछ ज्यादा ही खून बहने लगता है।जिसे देखकर आदमी घबरा जाता है।
नकसीर के कई कारण हो सकते हैं……
नकसीर के कई कारण हो सकते हैं……
- नाक के भीतर ज्यादा अंगुली रखना जिससे नाक की भीतरी कोमल परत में चोट लग जाए तो खून बहने लगता है
- उच्चरक्तचाप के मरीजों को भी नकसीर छूटता है
- नाक के भीतर संक्रमण हो जाने से रक्तस्त्राव होता है
- किसी की नाक में ट्यूमर होने सेभी रक्तस्त्राव होता है
- बाहर की हवा से नाक सूख जाती है वहां पपड़ी जम जाती है जिसे साफ करने पर भी रक्तस्त्राव होता है
- समुद्री सतह से उंचाई वाले स्थान पर भी लोगों को नाक से रक्तस्त्राव होता है
- विटामिन की कमी से मासिक धर्म में अनियमितता तथा धूप में अधिक काम करने से भी नाक से रक्तस्त्राव होता है
- खून पतला करने की दवा जैसे एस्प्रिन,हिपोरिन इत्यादि लेते रहने से भी रक्तस्त्राव होता है
- कई बार नाक में खून का थक्का जमा हुआ दिखाई पड़ता है यदि इसे मामूली समझकर इसकी अवहेलना की गई तो यह गले से होकर पेट में चला जाता है और पेट की भीतही दीवार में सूजन पैदा कर देता है जिससे मरीज को खून की उल्टि भी हो सकती है।
- नाक से बहने वाले खून की अनदेखी न करें चाहे बच्चा हो या बडा
- यदि अचानक नाक से रक्तस्त्राव होता है तो घबराये नहीं मरीज को शांत तथा ठंडे स्थान पर रखें
- मरीज की नाक अंगूठे तथा तर्जनी अंगुली से पांच मिनट के लिये दबायें, मुंह से सांस लेने को कहें यदि रक्त मुंह में आ रहा है तो थूकने को कहें
- मरीज को लिटा कर माथे तथा नाक पर बर्फ की पट्टी रखें इतनी देर मुंह से सांस लेने को कहें ,
- यदि नकसीर अक्सर आती रहती हो तो,रात में किशमिश पानी में भिगा दें फिर सुबह खाये नकसीर ठीक हो जाता है
- काली मिर्च, दही पुराने गुड़ में मिलाकर पिलाने से नकसीर ठीक हो जाता है
- आंवले का मुरब्बा चांदी का वर्क लगा हो,उसे दस पंद्रह ग्राम रोज सुबह शाम खाने फायदा होता है
- दस पंद्रह ग्राम गुलकंद सुबह शान रोज दूध या पानी से खायें
- सौंफ का अर्क दस,पंद्रह ग्राम,उसमें बराबर का पानी मिलाकर भोजन के बाद कुछ दिनों तक लेते रहें फायदा अवश्य होगा
- गर्मी के दिनों में ठंडा पेय पीते रहें जैसे शिकंजी ,लस्सी ,रूहआफजा,ठंडा पन्ना कच्चे आम का बाकी फलों का शर्बत।
- लू लगने से भी नकसीर अक्सर आती है
मोटापा घटाना है?
- मोटापे से कई बीमारियां जन्म लेती हैं जैसे हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर, इसी तरह महिलाओं में मोटापे से चलना मुश्किल हो जाता है। स्त्री हो या पुरुष, उनका वजन उनकी लंबाई के हिसाब से होना चाहिए जैसे 5 फिट लंबाई हो तो वजन 60 किलोग्राम कुछ कम या ज्यादा हो तो एडजस्ट किया जा सकता है।
- बदन हल्का छरहरा होना चाहिए। इतना वजन हो कि इंसान खुद से अपना भार उठा सके, जिंदगी का सुख ले सके, मोटापा से छुटकारा पाएं, दीर्घजीवी हों।
- मोटापा शरीर में चर्बी बढ़ने से होता है, इसलिए चर्बीयुक्त तथा कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थ का सेवन ना करें।
- हम अपने खाने-पीने का ध्यान ठीक से नहीं रखते, इसलिए मोटापा बिना पूछे बढ़ता रहता है। जैसे मांस, घी, चावल, तली चीजें, खाना खाने के बाद मीठा खाना, अधिक केले खाना, चिकनाई वाले पदार्थ खाना, खाना खाने के बाद तुरंत सो जाना, जरूरत के अनुसार श्रम ना करना, हमेशा जरूरत से ज्यादा खाना खाना, मासिक धर्म ना होना या गड़बड़ी होने से भी मोटापा बढ़ता है।
- भूख सेकम खाएं, फल ज्यादा खाएं, हरी सब्जियां खाएं, भोजन के एक घंटे बाद पानी पिएं
- गाजर का जूस रोज पिएं
- अंकुरित अनाज खाएं, लो कैलोरी वाला भोजन लें
- चिकनाई युक्त पदार्थ कम से कम खाएं। पुदीना वजन घटाता है, किसी भी रूप में लें
- शरीर के (टॉक्सिक) विष को बाहर निकलने दें मल मूत्र पसीना आदि के द्वारा। कब्ज दूर करें। तरल पदार्थ अधिक लें, जूस, पानी, सूप।
- गहरी सांस लें, नियमित हल्का-फुल्का व्यायाम करें
- कैल्शियम की मात्रा भोजन में बढ़ाएं, कारण इसमें एक तरह का हार्मोन निकलता है जो मेटाबॉलिज्म और रक्तसंचार को संतुलित रखता है इससे कैलरीज जलती है और मोटापा घटता है।
- हरी सब्जियां अधिक खाएं, नमक कम खाएं, टमाटर खाएं। कच्ची सब्जियां सलाद पर काला नमक, काली मिर्च, नींबू डालकर खाएं, सलाद का अधिक सेवन करें।
- हफ्ते में एक बार उपवास करें जीवन सुखी बनाएं।
कान
कान के दो भाग होते हैं
बाहरी कान जो हमें दिखाई देता है और उसकी बनावट हमारे चेहरे के अनुसार होती है, साधारणतया कान की चमड़ी बाहर की तरफ बढ़ती है, और मैल आदि को बाहर फेंकती जाती है।
बाहरी कान में होने वाली परेशानियाँ
कान में चोट लगना
बाहर के कान में कट जाना, खून जम जाना या नली में फ्रेक्चर आदि। इससे कान में अत्यधिक दर्द होता है, क्योंकि यहाँ की चमड़ी कान के कॉर्टीलेज से चिपकी हुई होती है।
भीतरी कान का हिस्सा जो हमें दिखाई नहीं देता परंतु उसमें भी तमाम तरह की परेशानियां हो जाती हैं।
कान में कीड़ा,या किसी वस्तुओं का चले जाना या डाला जाना। कई बार बच्चे खेलते-खेलते छोटी-छोटी वस्तुओं को कान में डाल लेते हैं। उन्हें विशेष औजारों द्वारा निकाला जाता है। अगर वस्तु अधिक अंदर हो तो बच्चे को बेहोश कर दूरबीन द्वारा भी इसे निकाल सकते हैं। कई बार सीरिजिंग द्वारा भी निकाल सकते हैं। अगर कीड़ा, मच्छर, झिंगुर, कान में गया हो तो कान में कुछ बूँद तेल डालने से कीड़ा मर जाता है, क्योंकि उसे ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और फिर उसे आसानी से निकाला जा सकता है।
कान में संक्रमण
कान को किसी नुकीली चीज से खुजलाने से या कान छेदने से कान में संक्रमण हो सकता है। कुछ वस्तुएँ जैसे क्रीम, इत्र कान में उपयोग में आने वाली दवाइयों की एलर्जी से भी संक्रमण होता है। कान लाल हो जाता है, खुजली आती है एवं दर्द हो सकता है।लोगों को इन चीजों का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है।
यूं तो कान से जुड़ी बीमारी का उम्र से कोई विशेष संबंध नहीं है, क्योंकि यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। फिर भी 50 वर्ष की उम्र से अधिक व्यक्तियों में कान से जुड़ी समस्याएं बड़े पैमाने पर देखने को मिलती हैं। इसलिए ठंड में बुजुर्गों को कान के प्रति ज्यादा सजग रहना चाहिए।
कान का दर्द
ठंडी हवा या कान में मैल जमने से या फिर फुंसी होने से कान में दर्द हो तो अदरक का रस कपड़े से छानकर, गुनगुना कर तीन-चार बूंद कान में डालें दिन भर में तीन चार बार। यदि कान में सांय-सांय कर रहा हो तो थोड़ा-थोड़ा सोंठ, गुड़, घी मिलकर खाने से ठीक हो जायेगा।
-आम के पत्ते पीसकर उसका रस हल्का गर्म कर कान में तीन-चार बूंद डालें। दर्द ठीक होगा।
-कान में कीडे-मकोड़ेका चले जानाअजवाइन के पत्तों के रस को कान में डालने से कान में चले गये कीडे-मकोड़े समाप्त हो जाते है।
-बहरापनअजवाइन के तेल को रोजाना कान में डालने से बहरापन दूर हो जाता है।
-कान को साउंड प्रदूषण से बचायें।
कान का बहना
मवाद जैसा या पानी कान से बहना, बहाव तीव्र या पुराना हो सकता है।
कान बहना बच्चों, किशोरों , किशोरियों, कुपोषित बच्चों गंदी जगहों पर रहने वाले लोग में आम हैं।
कारण:
सामान्य सर्दी-जुकाम के साथ इनफेक्श का होना।
लक्षण:
- एक या दोनों कानों में दर्द
-बदबूदार बहाव
- बुखार
सावधानियां:
बाहरी कान जो हमें दिखाई देता है और उसकी बनावट हमारे चेहरे के अनुसार होती है, साधारणतया कान की चमड़ी बाहर की तरफ बढ़ती है, और मैल आदि को बाहर फेंकती जाती है।
बाहरी कान में होने वाली परेशानियाँ
कान में चोट लगना
बाहर के कान में कट जाना, खून जम जाना या नली में फ्रेक्चर आदि। इससे कान में अत्यधिक दर्द होता है, क्योंकि यहाँ की चमड़ी कान के कॉर्टीलेज से चिपकी हुई होती है।
भीतरी कान का हिस्सा जो हमें दिखाई नहीं देता परंतु उसमें भी तमाम तरह की परेशानियां हो जाती हैं।
कान में कीड़ा,या किसी वस्तुओं का चले जाना या डाला जाना। कई बार बच्चे खेलते-खेलते छोटी-छोटी वस्तुओं को कान में डाल लेते हैं। उन्हें विशेष औजारों द्वारा निकाला जाता है। अगर वस्तु अधिक अंदर हो तो बच्चे को बेहोश कर दूरबीन द्वारा भी इसे निकाल सकते हैं। कई बार सीरिजिंग द्वारा भी निकाल सकते हैं। अगर कीड़ा, मच्छर, झिंगुर, कान में गया हो तो कान में कुछ बूँद तेल डालने से कीड़ा मर जाता है, क्योंकि उसे ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और फिर उसे आसानी से निकाला जा सकता है।
कान में संक्रमण
कान को किसी नुकीली चीज से खुजलाने से या कान छेदने से कान में संक्रमण हो सकता है। कुछ वस्तुएँ जैसे क्रीम, इत्र कान में उपयोग में आने वाली दवाइयों की एलर्जी से भी संक्रमण होता है। कान लाल हो जाता है, खुजली आती है एवं दर्द हो सकता है।लोगों को इन चीजों का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है।
यूं तो कान से जुड़ी बीमारी का उम्र से कोई विशेष संबंध नहीं है, क्योंकि यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। फिर भी 50 वर्ष की उम्र से अधिक व्यक्तियों में कान से जुड़ी समस्याएं बड़े पैमाने पर देखने को मिलती हैं। इसलिए ठंड में बुजुर्गों को कान के प्रति ज्यादा सजग रहना चाहिए।
कान का दर्द
ठंडी हवा या कान में मैल जमने से या फिर फुंसी होने से कान में दर्द हो तो अदरक का रस कपड़े से छानकर, गुनगुना कर तीन-चार बूंद कान में डालें दिन भर में तीन चार बार। यदि कान में सांय-सांय कर रहा हो तो थोड़ा-थोड़ा सोंठ, गुड़, घी मिलकर खाने से ठीक हो जायेगा।
-आम के पत्ते पीसकर उसका रस हल्का गर्म कर कान में तीन-चार बूंद डालें। दर्द ठीक होगा।
-कान में कीडे-मकोड़ेका चले जानाअजवाइन के पत्तों के रस को कान में डालने से कान में चले गये कीडे-मकोड़े समाप्त हो जाते है।
-बहरापनअजवाइन के तेल को रोजाना कान में डालने से बहरापन दूर हो जाता है।
-कान को साउंड प्रदूषण से बचायें।
कान का बहना
मवाद जैसा या पानी कान से बहना, बहाव तीव्र या पुराना हो सकता है।
कान बहना बच्चों, किशोरों , किशोरियों, कुपोषित बच्चों गंदी जगहों पर रहने वाले लोग में आम हैं।
कारण:
सामान्य सर्दी-जुकाम के साथ इनफेक्श का होना।
लक्षण:
- एक या दोनों कानों में दर्द
-बदबूदार बहाव
- बुखार
सावधानियां:
- कान में बिना मतलब तेल न डालें
- स्नान करते समय हमेशा दोनों कानों को बचाए या रूई लगायें
- जब भी बहाव हो, कान साफ करने के लिये मेडिकेटेड इयर बड इस्तेमाल करें
- ई.एन.टी चिकित्सक से उपचार के लिए उचित परामर्श लें
मोटापा
मोटापा तमाम बीमारियों को न्योता देता है।कुछ लोग मोटापे को अच्छीसेहत की निशानी मानकर चलते हैं लेकिन मोटापा एक अभिशाप स्वरूप है जो शारीरिक स्वास्थ्य के लिये एक गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।और जब यही मांसल देह एक सीमा से आगे निकल जाये तो मोटापे का कारण बन जाती है।
मोटापे का कारण
आधुनिक जीवन शैली,फास्ट फूड लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं उनमें उपस्थित अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट तथा वसा शरीर का मोटापा बढा देता है।फास्टफूड की क्षेणी में आने वाला व्यंजन जिसमें कार्बोहाड्रेट,वसा तथा शर्करा अधिक मात्रा में होते है और रेशे (फाइबर )विटामिन तथा खनिज कम मत्रा में होते हैं इसमें-पिज्जा,बर्गर,पेटीज,पेसट्री,केक ,चाउमिन,चिप्स,चॉकलेट,कोल्ड्रिंक।इसमें कैलोरी अधिक तथा पोषक तत्व न के बराबर होते हैं जो बच्चों को थुलथुल बनाता है।इस तरह अत्याधिक भोजन करना तथा श्रम या व्यायाम बिल्कुल न करना मोटापे को बढावा देता है।
अत्याधिक मीठे का सेवन भी मोटापे को बढाने का एक विषेश कारण है।इसके अलावा थायरॉयड,मधुमेह में लेने वाली इंशुलिन,गर्भनिरोधक दवाएं भी मोटापे को बढाती है।गर्भावस्था तथा प्रसव के बाद के गरिष्ठ खानपान तथा विश्राम से मोटापा बढता है।
मानसिक तनाव भी पाचन तंत्र तथा हार्मोन के स्त्राव पर बुरा प्रभाव डालती है जिससे शरीर में वसा का जमाव बढता है।
मोटापे के कई रूप होते हैं
एक तरह का मोटापा, जिनकी तोंद बढ़ जाती है,(पेट)बाकी के हिस्से पर मोटापा नहीं होता ऐसे लोगों को पेट से संबंधित कई बीमारियां हो जाती हैजैसे भूख अधिक लगना,एसिडिटी होना यह मोटापे की शुरूआत है ।ऐसे में लोगों को पित्ताशय में पथरी बनने की शिकायत भी देखी जाती है।
दूसरी तरह का मोटापा,
जिसमें पेट की अपेक्षा जांघों कथा नितंबों ,कूल्हों, पर चर्बी अधिक जमती है इस तरह का मोटापा ज्यादातर महिलाओं में अधिक देखने को मिलता है।ऐसे लोगों को गठिया, आर्थराइटिस का सामना करना पड़ सकता है।जब तक तोंद आवश्यकता से अधिक नहीं निकलती तब तक व्यक्ति को मोटापे का एहसास नहीं हो पाता।जिन महिलाओं के पेट अधिक निकलते हैं उन महिलाओं में एस्ट्रोजन के कारण वजन तेजी से बढ़ने लगता है।ऐसी महिलाओं में गर्भाशय का कैंसर का खतरा बढ़ता है।
तीसरे तरह का मोटापा,
कुछ लोगों में मोटापे का असर उनके पूरे शरीर पर देखने को मिलता हैयानि उनका शरीर पूरा गोल मटोल होता है।उनके गाल भी चर्बी से भरे लटकते रहते हैं।गर्दन पर चर्बी चढती है ।मोटापे के कारण कुछ महिलाओं के स्तन जरूरत से ज्यादा बढ़ जाते है जो लटकने लगते हैं देखने में बेढ़ंगे लगते हैं।
कुछ मोटापा आमतौर पर बचपन से ही शुरू हो जाता है क्योंकि ऐसे बच्चे शुरू से ही ज्यादा खाने के आदी बन जाते हैं।इनमें से वंशानुगत मोटापा लोगों को डायबिटीस, डिप्रेशन देती है।मानसिक तनाव से भरी जिंदगी गुजारते लोगों में डिप्रेशन के कारण एंड्रीनेलिन जैसे हार्मोन का उत्पादन अधिक मात्रा में होता है और उनकी भूख बढ़ जाती है जिससे वे बार-बार या ज्यादा खाने के शिकार बन जाते हैं जिसकी वजह से मोटापा बढ़ता है।
मोटापे से होने वाली परेशानियां-
शरीर पर मोटापे का प्रभाव अलग अलग अंगों पर अलग अलग तरह से असर डालता है।मोटापे से पीडित लोगों के खून में ग्लूकोज के साथ-साथ बुरी माने जाने वाली चर्बी(bad cholesterol) का स्तर सामान्य से ज्यादा बना रहने लगता है इससे खून में ग्लूकोज और बैडकोलेस्ट्रॉल परस्पर संयुक्त होकर ऐसे कणों में बदल जाते है जो उनकी रक्तवाहिनियों की अमदरूनी सतह पर परत के रूप ने जमने लगते है नतीजा रक्तवाहिनियां मोटी तथा संकरी होती जाती है और उनमें रक्त का प्रवाह धीमा पडने लगता है। रक्तवाहिनियां अपनी स्वाभाविक लचक खो देती हैं।ऐसा जब ह्रदय को रक्त पहुँचाने वाल धमनियों में होता है तो उसके कारण ह्रदय रोग की शुरूआत होने लगती है। ब्रिटेन के जानेमाने ह्रदय रोग विषेशज्ञ डॉक्टर रॉबिन्सन के अनुसार मोटापा उच्चरक्तचाप का प्रमुख कारण है।आगे चलकर मस्तिष्क से संबंधित खून की नलियों के फटने या खून के रिसाव के कारण लकवा मारने की संभावना भी बढ़ जाती है।
मोटापे तथा डायबिटीस, (मधुमेह) का आपस में चोली दामन का संबंध होता है। डायबिटीस के दौरान शरीर में ग्लूकोज का इस्तेमाल ठीक ढंग से नहीं हो पाता और ग्लूकोज चर्बी में बदलकर शरीर के अंदर जमा होने लग जाती है।विशेषज्ञ मोटापे को अधिकतर डायबिटीस के पूर्व संकेत के रूप में देखते है।
पीठ का दर्द, अधिक मोटे लोगों में शरीर का उपरी हिस्सा ज्यादा भारी होता है जिसकी वजह से कमर में झुकाव होने लगता है जिसके कारण मोटे लोगों में प्राय पीठ के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत होने लगती है।
हार्निया, मोटेलोगों में हार्निया संबंधित शिकायत सामान्य लोगों के मुकाबले दो गुना ज्यादा होती है ।कारण मोटे लोगों मेंउनके स्नायु तंन्तु कमजोर पडने से ढीले पडने लगते है जिससे वह न तो शरीर के आंतरिक अंगो को ठीक से सहारा दे पाते हैंऔर न ही उन्हें अपनी जगह पर स्थिर बनाये रख पाते हैं, जिसकी वजह से आंतरिक अंगों पर चढी परत जरा से झटके से टूटने लगती है जो हार्निया का कारण बनती है।
मोटापे का प्रजनन पर बुरा प्रभाव, मोटापे का लोगों के दाम्पत्य तथा सेक्स जीवन पर काफी प्रभाव पडता है।मोटापे से पीडित महिलाओं में मासिक अनियमितताएं देखने को मिलती है।मोटापे से बांझपन तथा प्रदर रोग की संभावनाएं बढ़ती हैं।मोटापा गर्भधारण में बाधक बनता है।गर्भावस्था में अनेक परेशानियां पैदा करता है ।कारण प्रसव के समय कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है ।अधय्यनों से पता चला है कि मोटी महिलाओं में पहले तो गर्भ धारण करने की संभावनाएं कम हो जाती हैं तथा गर्भपात का खतरा भी बना रहता है।ऐसी महिलाओं को गर्भधारण करते साथ ही डॉक्टरी परमर्श से चलना जरूरी हो जाता है।गर्भाशय का कैंसर होने का खतरा भी बना रहता है।
सांस तथा दमे की शिकायत की बीमारी,मोटापे के कारण अक्सर लोगों में श्वास संबंधित तकलीफें बनी रहती है कारण है उनका ज्यादा वजन उनकी छाती के पंजर की स्वतंत्र गतिविधियों में बाधा डालने लगता है।ह्रदय की कार्य क्षमता पर दबाव पडता है जिससे सांस लेने तथा छोडने में परेशानी महसूस होती है.सांस फूलती है फेफडों में रक्त का संचार धीमा पडने लगता है.मोटे लोग जरा सा श्रम करने से या चलनें से सीढी चढने से हांफने लगते हैं मोटे लोगों में ब्रेन सेट्रोक का खतरा भी सामान्य लोगों के मुकाबले ज्यादा होता है । मोटे लोगों के खून में कोलेस्टॉल का स्तर हमेशा ज्यादा ही रहने लगता है इससे उनके दमाग में खून की सप्लाई में रूकावट आने से दीमाग की धमनी फटने अर्थात ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
सर्दियों में मोटापा क्यों बढता है,उर्जा से भरपूर आहार मोटापा को बढाता है।सर्दियों में सामान्य आहार के अलावा अन्य उर्जा बढाने वासे वस्तुओं का भी सेवन करते हैं जैसे मूंगफल्ली,गजक,बादाम,काजू, पिस्ता, गरी ,गाजर का हल्वा,घी चुपडी मक्की तथा बाजरे की रोटी ये सारी वस्तुएं हमें अधिक उर्जा देती है जो हमारे शरीरर में वसा के रूप में जमा होकर शरीर का मोटापा बढा देती है सर्दी के कारण हम व्यायाम में भी कंजूसी करते हैं,दूसरा कारण सर्दियों में पानी कम पीते हैं जिसकी वजह से पाचनक्रिया ठीक ढंग से काम नहीं कर पाती है औशरीर से और अनावश्यक तत्वों का निष्काशन ठीक तरह से नहीं हो पाता ।
गर्मियोंमें मोटापा क्यों नहीं बढता,कारण हल्का भोजन ,भोजन के साथ सलाद या फिर भोजन की जगह सलाद भी ले लेते हैं।भोजन के बाद फालतू उर्जा वाली चीजें भी नहीं खाते।प्रति दिनपर्याप्त मात्रा में पानी भी पीते हैं साथ नींबू पानी(शिकंजी)भी लेते हैं।
अब बात करते हैं मोटापे को नियंत्रित रखने वाला आहार के बारे में- कम उर्जा वाले व्यंजनों का सेवन करना जैसे,भुने चने,मूंग दाल,दलिया, बिना घी की मक्की की रोटी खायें, उडद की दाल का सेवन कम करें कारण यह गरिष्ठ होती है।
कोल्डड्रिंक, आइस्क्रीम, पेस्ट्री, पेटीज यानि जंक फूड का इस्तेमाल कम करें ।लंच या डिनर में संतुलित आहार लें जिसमें कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन कम मात्रा में हो ताकि आसानी से पच सके साथ भूख मिटने का एहसास भी हो।
अंकुरित अनाज दालें सुबह नाश्ते में लें जिससे भरपूर मात्रा में विटामिन तथा खनिज प्राप्त होता रहे।यदि मांसाहार हैं तो भुना(rosted) हुआ मांस खायें जिसमें घी तेल कम मात्रा में हो।अधिक चिकनाई युक्त दूध ,दही तथा इससे बना पनीर या पनीर की रोटी या परांठे न खायें।इसके लिये टोफू (Tofu) खा सकते हैं यह सोया मिल्क से बनता है सोया मोटापा कम करने में सहायक है।
मौसमी हरी साग सब्जियों का सेवन करें जैसे,मेथी, पालक, बथुआ, चौलाईसाग जिनमें कैल्शियम अधिक पाया जाता है।मूली,गाजर, टमाटर कच्चा यानि सलाद के रूप में खायें या इसकी रोटी भी खा सकते हैं।इन सब्जियों के रस का सेवन भी कर सकते हैं घर ही में जूस निकाल कर पियें।गाजर में बेटाकैरोटिन अधिक मात्रा में पाया जाता है जो हमारी आंखों केलिये लाभदायक है साथ मोटापा कम करता है। टमाटर में लाईकोपिन होता है ये दोनों ही तत्व अनाक्सीकारक पदार्थ हैं जो फ्री रेडिकल्स से हमारी रक्षा करते हैं।
नींबू का रस गुनगुने पानी में निचोडकर पियें इससे पानी पीने की तासीर बढती है तथा भोजन ठीक तरह से पचकर निष्काशन क्रिया ठीक ढंग से होती है। शरीर हल्का रहता है।सर्दियों में चाय नींबू वाली पियें तो गैस नहीं बनती है।दूध वाली चाय पीने से भूख तथा प्यास दोनों मर जाती है पता भी नहीं चलता।सर्दियों में हर चाय के थोडी देर बाद पानी अवश्य पियें।
व्यायाम कई समस्याओं का हल है, ठंड के दिनों में हम ठंड की वजह से व्यायाम नहीं करते हैं या व्यायाम करने में कंजूसी करते है टहलने से जी चुराते हैं बिस्तर पर पडे रहते हैं जो सेहत के लिये काफी नुकसान देय है।जबकि शरीर को व्यायाम की जरूरत गर्मियों से ज्यादा सर्दियों में अधिक होती हैकारण जाडे में रक्त कुछ गाढा सा हो जाता है जिससे रक्त संचारण की गति धीमी पड़ जाती है व्यायाम करने से रक्त द्रवित हो जाता है संचारण गति तेज हो जाती है।जिससे गरिष्ठ भोजन द्वारा प्राप्त फालतू कैलोरीज की खपत हो जाती हैशरीर में चर्बी नहीं जमने पाती मोटापा बढ़ने नहीं पाता।
शुद्ध हवा तथा धूप का सेवन भी करें हवा , ठंड में भी कमरे में खुली तथा शुद्ध हवा आने के स्त्रोतों को पूरी तरह बंद न करें ।सीधी हवा न लें परंतु शुद्ध हवा शयन कक्ष में अवश्य आनी जरूरी है कारण शुद्ध हवा में ऑक्सीजन के रहने से फेफडों में रक्तशुधिकरण सुचारू रूप से होता है तथा चयापचन की गति धीमी नहीं पडती हम बराबर फुर्तीले बने रहते हैं। हाल ही में शोधों से पता है कि पर्याप्त मात्रा में धूप न मिल पाने से डिप्रेशन बढता है ,मनुष्य गुमसुम सा रहता है फुर्तीलापन नहीं हो पाता है ।पाचनक्रिया की दर में गिरावट आती है आहार से प्राप्त उर्जा की खपत (कैलोरी बर्न) नहीं हो पाती है जिससे शरीर में वसा का जमाव बढ दाता है और मोटापा बढने लगता है।
मोटापा कम करने के कुछ कारगर उपाय,
सोयाबीन मोटापा घटाता है,
सोयाबीन पर किये गये शोध से पता चला है कि सोयाबीन में प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन उपलब्ध होता है इसमें पाया जाने वाला आइसोफ्लेवंस नामक प्रोटीन शरीर में जमी चर्बी के भंडार को कम करके मांसपेशियों को मजबूती देता है तथा चर्बी के भंडारण को कम करके मांसपेशियों को मजबूती देता है चर्बी वाली कोशिकाओं की वृद्धि रोकने में अहम भूमिका निभाता है।सोयाबीन महिलाओं में मीनोपॉज के दौरान चर्बी हीन उत्तकों के क्षय को भी रोकता है। सोयाबीन के इन्हीं गुणों के कारण मोटापे के शिकार लोगों के लिये सोयाबीन एक रामबाण दवा के समान सिद्ध माना गया है।तो सोयाबीन को अपने आहार में अवश्य शामिल करें।
नींबू, एक ग्लास पानी में एक नींबू निंचोडकर रोज सुबह बासी मुंह पियें यदि सर्दियों में मोटापा कुछ बढ़ गया हो तो गर्मी भर दो मास नींबू पानी पियें इससे आंतरिक चर्बी घट जायेगी।
शहद,शहद मोटापा कम करके शरीर को छरहरा बनाता है मोटापे में शक्कर की जगह शहद इस्तेमाल करें यदि डायबिटीस न हो तो।दो चम्मच शहद एक ग्लास पानी में डालकर एक बडा चम्मच नींबू का रस गुनगुने पानी में डालकर सूबह शाम रोजाना पियें तथा खानपान पर भी ध्यान रखें मोटापा कम अवश्य होगा ।
दही, दही खाने से शरीर की फालतू चर्बी घटती है।यदि मोटापा आ भी गया हो तो रोज दही खायें तथा मट्ठा पियें दिन में दो तीन बार।
मूली ,दो बड़ा चम्मच मूली का रस में शहद मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ सेवन करें डेढ़ माह तक। मोटापा अवश्य कम होगा।
व्यायाम, नियमित रूप से व्यायाम किया जाये ,जैसे साइकलिंग,जॉगिंग,सीढ़ी चढ़ना उतरना,रस्सी कूदना,टहलना घूमना, इस तरह के व्यायाम करते रहने से वजन घटाया जा सकता है। इसके साथ साथ उपर बताए गये तरीके से खानपान के अनुसार चलें तो स्वस्थ एंव छरहरे बने रह सकते हैं।
मोटापे का कारण
आधुनिक जीवन शैली,फास्ट फूड लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं उनमें उपस्थित अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट तथा वसा शरीर का मोटापा बढा देता है।फास्टफूड की क्षेणी में आने वाला व्यंजन जिसमें कार्बोहाड्रेट,वसा तथा शर्करा अधिक मात्रा में होते है और रेशे (फाइबर )विटामिन तथा खनिज कम मत्रा में होते हैं इसमें-पिज्जा,बर्गर,पेटीज,पेसट्री,केक ,चाउमिन,चिप्स,चॉकलेट,कोल्ड्रिंक।इसमें कैलोरी अधिक तथा पोषक तत्व न के बराबर होते हैं जो बच्चों को थुलथुल बनाता है।इस तरह अत्याधिक भोजन करना तथा श्रम या व्यायाम बिल्कुल न करना मोटापे को बढावा देता है।
अत्याधिक मीठे का सेवन भी मोटापे को बढाने का एक विषेश कारण है।इसके अलावा थायरॉयड,मधुमेह में लेने वाली इंशुलिन,गर्भनिरोधक दवाएं भी मोटापे को बढाती है।गर्भावस्था तथा प्रसव के बाद के गरिष्ठ खानपान तथा विश्राम से मोटापा बढता है।
मानसिक तनाव भी पाचन तंत्र तथा हार्मोन के स्त्राव पर बुरा प्रभाव डालती है जिससे शरीर में वसा का जमाव बढता है।
मोटापे के कई रूप होते हैं
एक तरह का मोटापा, जिनकी तोंद बढ़ जाती है,(पेट)बाकी के हिस्से पर मोटापा नहीं होता ऐसे लोगों को पेट से संबंधित कई बीमारियां हो जाती हैजैसे भूख अधिक लगना,एसिडिटी होना यह मोटापे की शुरूआत है ।ऐसे में लोगों को पित्ताशय में पथरी बनने की शिकायत भी देखी जाती है।
दूसरी तरह का मोटापा,
जिसमें पेट की अपेक्षा जांघों कथा नितंबों ,कूल्हों, पर चर्बी अधिक जमती है इस तरह का मोटापा ज्यादातर महिलाओं में अधिक देखने को मिलता है।ऐसे लोगों को गठिया, आर्थराइटिस का सामना करना पड़ सकता है।जब तक तोंद आवश्यकता से अधिक नहीं निकलती तब तक व्यक्ति को मोटापे का एहसास नहीं हो पाता।जिन महिलाओं के पेट अधिक निकलते हैं उन महिलाओं में एस्ट्रोजन के कारण वजन तेजी से बढ़ने लगता है।ऐसी महिलाओं में गर्भाशय का कैंसर का खतरा बढ़ता है।
तीसरे तरह का मोटापा,
कुछ लोगों में मोटापे का असर उनके पूरे शरीर पर देखने को मिलता हैयानि उनका शरीर पूरा गोल मटोल होता है।उनके गाल भी चर्बी से भरे लटकते रहते हैं।गर्दन पर चर्बी चढती है ।मोटापे के कारण कुछ महिलाओं के स्तन जरूरत से ज्यादा बढ़ जाते है जो लटकने लगते हैं देखने में बेढ़ंगे लगते हैं।
कुछ मोटापा आमतौर पर बचपन से ही शुरू हो जाता है क्योंकि ऐसे बच्चे शुरू से ही ज्यादा खाने के आदी बन जाते हैं।इनमें से वंशानुगत मोटापा लोगों को डायबिटीस, डिप्रेशन देती है।मानसिक तनाव से भरी जिंदगी गुजारते लोगों में डिप्रेशन के कारण एंड्रीनेलिन जैसे हार्मोन का उत्पादन अधिक मात्रा में होता है और उनकी भूख बढ़ जाती है जिससे वे बार-बार या ज्यादा खाने के शिकार बन जाते हैं जिसकी वजह से मोटापा बढ़ता है।
मोटापे से होने वाली परेशानियां-
शरीर पर मोटापे का प्रभाव अलग अलग अंगों पर अलग अलग तरह से असर डालता है।मोटापे से पीडित लोगों के खून में ग्लूकोज के साथ-साथ बुरी माने जाने वाली चर्बी(bad cholesterol) का स्तर सामान्य से ज्यादा बना रहने लगता है इससे खून में ग्लूकोज और बैडकोलेस्ट्रॉल परस्पर संयुक्त होकर ऐसे कणों में बदल जाते है जो उनकी रक्तवाहिनियों की अमदरूनी सतह पर परत के रूप ने जमने लगते है नतीजा रक्तवाहिनियां मोटी तथा संकरी होती जाती है और उनमें रक्त का प्रवाह धीमा पडने लगता है। रक्तवाहिनियां अपनी स्वाभाविक लचक खो देती हैं।ऐसा जब ह्रदय को रक्त पहुँचाने वाल धमनियों में होता है तो उसके कारण ह्रदय रोग की शुरूआत होने लगती है। ब्रिटेन के जानेमाने ह्रदय रोग विषेशज्ञ डॉक्टर रॉबिन्सन के अनुसार मोटापा उच्चरक्तचाप का प्रमुख कारण है।आगे चलकर मस्तिष्क से संबंधित खून की नलियों के फटने या खून के रिसाव के कारण लकवा मारने की संभावना भी बढ़ जाती है।
मोटापे तथा डायबिटीस, (मधुमेह) का आपस में चोली दामन का संबंध होता है। डायबिटीस के दौरान शरीर में ग्लूकोज का इस्तेमाल ठीक ढंग से नहीं हो पाता और ग्लूकोज चर्बी में बदलकर शरीर के अंदर जमा होने लग जाती है।विशेषज्ञ मोटापे को अधिकतर डायबिटीस के पूर्व संकेत के रूप में देखते है।
जोडों की बीमारी,
मोटापा बढ़ने पर शरीर का सारा भार हमारे पैर यानि पंजों, टखनोंपर, कूल्हों के जोडों पर पडता है अधिक वजन ढोते रहने के कारण हड्डियां धीरे धीरे भुरभरी होने लगती हैजिससे उन जोडों में धीरे धीरे अस्थिक्षय (हड्डियों में कमजोरी तथा टूटफूट) आस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण पैदा होने लगते हैं। आस्टियोआर्थराइटिस में जोडों में ऐंठन युक्तसूजन ,दर्द बना रहता है जिससे लोगों में चलना फिरना दूभर हो जाता है।बोन फ्रेक्चर तक का खतरा बढ़ जाता है और हड्डियां जुडने में समय अधिक लगता है।
हार्निया, मोटेलोगों में हार्निया संबंधित शिकायत सामान्य लोगों के मुकाबले दो गुना ज्यादा होती है ।कारण मोटे लोगों मेंउनके स्नायु तंन्तु कमजोर पडने से ढीले पडने लगते है जिससे वह न तो शरीर के आंतरिक अंगो को ठीक से सहारा दे पाते हैंऔर न ही उन्हें अपनी जगह पर स्थिर बनाये रख पाते हैं, जिसकी वजह से आंतरिक अंगों पर चढी परत जरा से झटके से टूटने लगती है जो हार्निया का कारण बनती है।
मोटापे का प्रजनन पर बुरा प्रभाव, मोटापे का लोगों के दाम्पत्य तथा सेक्स जीवन पर काफी प्रभाव पडता है।मोटापे से पीडित महिलाओं में मासिक अनियमितताएं देखने को मिलती है।मोटापे से बांझपन तथा प्रदर रोग की संभावनाएं बढ़ती हैं।मोटापा गर्भधारण में बाधक बनता है।गर्भावस्था में अनेक परेशानियां पैदा करता है ।कारण प्रसव के समय कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है ।अधय्यनों से पता चला है कि मोटी महिलाओं में पहले तो गर्भ धारण करने की संभावनाएं कम हो जाती हैं तथा गर्भपात का खतरा भी बना रहता है।ऐसी महिलाओं को गर्भधारण करते साथ ही डॉक्टरी परमर्श से चलना जरूरी हो जाता है।गर्भाशय का कैंसर होने का खतरा भी बना रहता है।
सांस तथा दमे की शिकायत की बीमारी,मोटापे के कारण अक्सर लोगों में श्वास संबंधित तकलीफें बनी रहती है कारण है उनका ज्यादा वजन उनकी छाती के पंजर की स्वतंत्र गतिविधियों में बाधा डालने लगता है।ह्रदय की कार्य क्षमता पर दबाव पडता है जिससे सांस लेने तथा छोडने में परेशानी महसूस होती है.सांस फूलती है फेफडों में रक्त का संचार धीमा पडने लगता है.मोटे लोग जरा सा श्रम करने से या चलनें से सीढी चढने से हांफने लगते हैं मोटे लोगों में ब्रेन सेट्रोक का खतरा भी सामान्य लोगों के मुकाबले ज्यादा होता है । मोटे लोगों के खून में कोलेस्टॉल का स्तर हमेशा ज्यादा ही रहने लगता है इससे उनके दमाग में खून की सप्लाई में रूकावट आने से दीमाग की धमनी फटने अर्थात ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
सर्दियों में मोटापा क्यों बढता है,उर्जा से भरपूर आहार मोटापा को बढाता है।सर्दियों में सामान्य आहार के अलावा अन्य उर्जा बढाने वासे वस्तुओं का भी सेवन करते हैं जैसे मूंगफल्ली,गजक,बादाम,काजू, पिस्ता, गरी ,गाजर का हल्वा,घी चुपडी मक्की तथा बाजरे की रोटी ये सारी वस्तुएं हमें अधिक उर्जा देती है जो हमारे शरीरर में वसा के रूप में जमा होकर शरीर का मोटापा बढा देती है सर्दी के कारण हम व्यायाम में भी कंजूसी करते हैं,दूसरा कारण सर्दियों में पानी कम पीते हैं जिसकी वजह से पाचनक्रिया ठीक ढंग से काम नहीं कर पाती है औशरीर से और अनावश्यक तत्वों का निष्काशन ठीक तरह से नहीं हो पाता ।
गर्मियोंमें मोटापा क्यों नहीं बढता,कारण हल्का भोजन ,भोजन के साथ सलाद या फिर भोजन की जगह सलाद भी ले लेते हैं।भोजन के बाद फालतू उर्जा वाली चीजें भी नहीं खाते।प्रति दिनपर्याप्त मात्रा में पानी भी पीते हैं साथ नींबू पानी(शिकंजी)भी लेते हैं।
अब बात करते हैं मोटापे को नियंत्रित रखने वाला आहार के बारे में- कम उर्जा वाले व्यंजनों का सेवन करना जैसे,भुने चने,मूंग दाल,दलिया, बिना घी की मक्की की रोटी खायें, उडद की दाल का सेवन कम करें कारण यह गरिष्ठ होती है।
कोल्डड्रिंक, आइस्क्रीम, पेस्ट्री, पेटीज यानि जंक फूड का इस्तेमाल कम करें ।लंच या डिनर में संतुलित आहार लें जिसमें कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन कम मात्रा में हो ताकि आसानी से पच सके साथ भूख मिटने का एहसास भी हो।
अंकुरित अनाज दालें सुबह नाश्ते में लें जिससे भरपूर मात्रा में विटामिन तथा खनिज प्राप्त होता रहे।यदि मांसाहार हैं तो भुना(rosted) हुआ मांस खायें जिसमें घी तेल कम मात्रा में हो।अधिक चिकनाई युक्त दूध ,दही तथा इससे बना पनीर या पनीर की रोटी या परांठे न खायें।इसके लिये टोफू (Tofu) खा सकते हैं यह सोया मिल्क से बनता है सोया मोटापा कम करने में सहायक है।
मौसमी हरी साग सब्जियों का सेवन करें जैसे,मेथी, पालक, बथुआ, चौलाईसाग जिनमें कैल्शियम अधिक पाया जाता है।मूली,गाजर, टमाटर कच्चा यानि सलाद के रूप में खायें या इसकी रोटी भी खा सकते हैं।इन सब्जियों के रस का सेवन भी कर सकते हैं घर ही में जूस निकाल कर पियें।गाजर में बेटाकैरोटिन अधिक मात्रा में पाया जाता है जो हमारी आंखों केलिये लाभदायक है साथ मोटापा कम करता है। टमाटर में लाईकोपिन होता है ये दोनों ही तत्व अनाक्सीकारक पदार्थ हैं जो फ्री रेडिकल्स से हमारी रक्षा करते हैं।
नींबू का रस गुनगुने पानी में निचोडकर पियें इससे पानी पीने की तासीर बढती है तथा भोजन ठीक तरह से पचकर निष्काशन क्रिया ठीक ढंग से होती है। शरीर हल्का रहता है।सर्दियों में चाय नींबू वाली पियें तो गैस नहीं बनती है।दूध वाली चाय पीने से भूख तथा प्यास दोनों मर जाती है पता भी नहीं चलता।सर्दियों में हर चाय के थोडी देर बाद पानी अवश्य पियें।
व्यायाम कई समस्याओं का हल है, ठंड के दिनों में हम ठंड की वजह से व्यायाम नहीं करते हैं या व्यायाम करने में कंजूसी करते है टहलने से जी चुराते हैं बिस्तर पर पडे रहते हैं जो सेहत के लिये काफी नुकसान देय है।जबकि शरीर को व्यायाम की जरूरत गर्मियों से ज्यादा सर्दियों में अधिक होती हैकारण जाडे में रक्त कुछ गाढा सा हो जाता है जिससे रक्त संचारण की गति धीमी पड़ जाती है व्यायाम करने से रक्त द्रवित हो जाता है संचारण गति तेज हो जाती है।जिससे गरिष्ठ भोजन द्वारा प्राप्त फालतू कैलोरीज की खपत हो जाती हैशरीर में चर्बी नहीं जमने पाती मोटापा बढ़ने नहीं पाता।
शुद्ध हवा तथा धूप का सेवन भी करें हवा , ठंड में भी कमरे में खुली तथा शुद्ध हवा आने के स्त्रोतों को पूरी तरह बंद न करें ।सीधी हवा न लें परंतु शुद्ध हवा शयन कक्ष में अवश्य आनी जरूरी है कारण शुद्ध हवा में ऑक्सीजन के रहने से फेफडों में रक्तशुधिकरण सुचारू रूप से होता है तथा चयापचन की गति धीमी नहीं पडती हम बराबर फुर्तीले बने रहते हैं। हाल ही में शोधों से पता है कि पर्याप्त मात्रा में धूप न मिल पाने से डिप्रेशन बढता है ,मनुष्य गुमसुम सा रहता है फुर्तीलापन नहीं हो पाता है ।पाचनक्रिया की दर में गिरावट आती है आहार से प्राप्त उर्जा की खपत (कैलोरी बर्न) नहीं हो पाती है जिससे शरीर में वसा का जमाव बढ दाता है और मोटापा बढने लगता है।
मोटापा कम करने के कुछ कारगर उपाय,
सोयाबीन मोटापा घटाता है,
सोयाबीन पर किये गये शोध से पता चला है कि सोयाबीन में प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन उपलब्ध होता है इसमें पाया जाने वाला आइसोफ्लेवंस नामक प्रोटीन शरीर में जमी चर्बी के भंडार को कम करके मांसपेशियों को मजबूती देता है तथा चर्बी के भंडारण को कम करके मांसपेशियों को मजबूती देता है चर्बी वाली कोशिकाओं की वृद्धि रोकने में अहम भूमिका निभाता है।सोयाबीन महिलाओं में मीनोपॉज के दौरान चर्बी हीन उत्तकों के क्षय को भी रोकता है। सोयाबीन के इन्हीं गुणों के कारण मोटापे के शिकार लोगों के लिये सोयाबीन एक रामबाण दवा के समान सिद्ध माना गया है।तो सोयाबीन को अपने आहार में अवश्य शामिल करें।
नींबू, एक ग्लास पानी में एक नींबू निंचोडकर रोज सुबह बासी मुंह पियें यदि सर्दियों में मोटापा कुछ बढ़ गया हो तो गर्मी भर दो मास नींबू पानी पियें इससे आंतरिक चर्बी घट जायेगी।
शहद,शहद मोटापा कम करके शरीर को छरहरा बनाता है मोटापे में शक्कर की जगह शहद इस्तेमाल करें यदि डायबिटीस न हो तो।दो चम्मच शहद एक ग्लास पानी में डालकर एक बडा चम्मच नींबू का रस गुनगुने पानी में डालकर सूबह शाम रोजाना पियें तथा खानपान पर भी ध्यान रखें मोटापा कम अवश्य होगा ।
दही, दही खाने से शरीर की फालतू चर्बी घटती है।यदि मोटापा आ भी गया हो तो रोज दही खायें तथा मट्ठा पियें दिन में दो तीन बार।
मूली ,दो बड़ा चम्मच मूली का रस में शहद मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ सेवन करें डेढ़ माह तक। मोटापा अवश्य कम होगा।
व्यायाम, नियमित रूप से व्यायाम किया जाये ,जैसे साइकलिंग,जॉगिंग,सीढ़ी चढ़ना उतरना,रस्सी कूदना,टहलना घूमना, इस तरह के व्यायाम करते रहने से वजन घटाया जा सकता है। इसके साथ साथ उपर बताए गये तरीके से खानपान के अनुसार चलें तो स्वस्थ एंव छरहरे बने रह सकते हैं।
बच्चों के कान का दर्द
कारण
कान दर्द का निवारण-
- बच्चों के कान में दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं
- मौसम के हिसाब से देखा जाय तो कई बार ठंड की वजह से भी बच्चों के कान में दर्द होता है.
- नहाते समय कान में पानी चला जाता है इससे भी दर्द होता है
- कभी कभी बच्चे अपने कान में कोई चीज उठा कर डाल लेते हैं इससे भी दर्द होजाता है
- .कई बार बिना किसी कारण भी कान मे दर्द हो जाता है
- कोई भी उपाय खुद न आजमाए पहले डाक्टर से परामर्श लें
कान दर्द का निवारण-
- बच्चों के कान में जब भी दर्द हो उन्हे खाने पीने के लिये कोई भी ठंडी चीज न दें ,पानी भी गुनगुना पीने को दें
- ठंडी हवा में कान मे टोपी लगाये
- बच्चों के कान में दर्द हो तो बच्चो को झूले में डालकर जोर जोर से न हिलायें
- नहलाते समय ध्यान रखें कि बच्चे के कान में पानी न जाय
- छोटे बच्चों को ध्वनि प्रदूषण से दूर रखें
- बच्चों के कान में तेल डालकर साफ करने की कोशिश नकरें
- शिशु को हमेशा बैठकर ही दूध पिलायें कारण कई बार कान में दूध जाने से एंव मैल होनेसे ,दोनों के मिलने से कान में इनफेक्शन होताहै ।
- शिशु को कान में दर्द हो तो माता के दूध की दो तीनबूद कान में टपकाए सिर्फ दूध से इन्फेक्शन नहीं होता बल्कि माता का दूध तो बच्चे के लिये कई बीमारियों की दवा का काम करता है.
यदि आपके शरीर का वजन अधिक है, तो
से पोषक तत्व लें जिसमें ऊर्जा अधिक न हो। भोजन करते समय तीन बातों का ध्यान रखें-
* ऐसा भोजन हो जिससे प्राप्त ऊर्जा शक्ति अधिक न हो।
* पर्याप्त पोषक तत्व हो।
* चिकनाई की मात्रा कम हो।
जैसे दूध से बने पदार्थ, आइस्क्रीम या कोल्ड ड्रिंक अधिक नहीं लेना चाहिये। जैसे शराब शरीर के लिये हानिकारक है इससे प्राप्त ऊर्जा हमारे किसी काम नहीं आती परंतु व्यायाम नियमित करें क्योंकि व्यायाम करने से ऊर्जा खर्च होती हैं। भूख खुलकर लगती है आप ऐसे फल खायें, जो पेट तो भर जाये पर ऊर्जा कम दें। फल और सब्जियों से ऊर्जा कम मिलती है लकिन विटामिन व खनिज अधिक मात्रा में मिलता
इस तरह लीजिए डाइट….
दिन की शुरुआत कभी भी कॉफी या चाय के साथ न करें। कैफीन वालीचीजें बीपी व हार्ट रेट बढ़ाती हैं। इससे शरीर में तनाव महसूस होता है ,जोकि पाचन तंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन है। हम चाय या कॉफी पीकर नींदखुलने जैसा महसूस करते हैं , उसकी असली वजह हार्ट व ब्रिदिंग रेट काबढ़ना होता है। सुबह के वक्त बॉडी रिलैक्स होती है और हार्ट व ब्रिदिंग रेटसबसे कम होता है। इस रिलैक्स को बनाए रखने के लिए वास्तविक खाने कीजरूरत होती है। चाय कॉफी से पिछले कई घंटे से भूखे सेल्स को जीरोन्यूट्रिशन मिलता है। इससे भूख मरती है और आप लंबे वक्त कर बिना महसूसकिए भूखे रहते हैं। सूरज निकलने के साथ मेटाबॉलिज्म पीक पर होता है।ऐसे में इस वक्त सबसे ज्यादा खाने की जरूरत होती है। अगर आप कुछ ठोसनहीं खाना चाहते तो फल खा सकते हैं। इसके एक घंटे बाद फाइबर युक्तचीजें खाएं , जैसे रोटी - सब्जी , उपमा , इडली , पोहा आदि लेना चाहिए।एक बार सेल्स को न्यूट्रिशन मिल जाए तो आप चाय - कॉफी ले सकते हैं।
- हर दो घंटे में खाएं।
इससे आप मोटे नहीं होंगे , बल्कि खाने की मात्रा कमहोगी। ऐसे में एक वक्त में आप कम कैलरी लेंगे। ये कैलरी बेहतर तरीके सेइस्तेमाल होंगी और शरीर में जमा नहीं होंगी। थोड़े - थोड़े अंतराल पर खानेसे बॉडी को बेहतर महसूस होता है।
ज्यादा ऐक्टिव हों तो ज्यादा खाएं और कम एक्टिव हों तो कम।
अगर खुदको भूखे रखना सजा है तो ज्यादा खाना अपराध। बिना यह ध्यान दिए किहमारे पेट को क्या जरूरत है , हम खाते जाते हैं। हम मोटे इसलिए होते हैं ,क्योंकि हम सही वक्त पर खाने के बजाय गलत वक्त पर खाते हैं। उदाहरण केलिए लड्डू में काफी कैलरी होती है और अगर लड्डू खाने के साथ या रात मेंखाएं तो उन्हें कैलरी के रूप में शरीर में जमा होने से कोई नहीं रोक सकता।भरे पेट ( खाने के बाद ) और मेटाबॉलिक रेट कम होने के बाद ( सूर्यास्त केबाद ) शरीर पोषक न्यूट्रिएंट लेना बंद कर देता है। एक अच्छी औरतनावरहित नींद भी फैट कम करने में मदद करती है। सही तरीका यह है किरात में 6: 30 बजे तक पूरा खाना और 8: 30 बजे तक हल्का खाना खा लें।स्ट्रेस टाइम , बीमारी और ट्रैवल के वक्त ज्यादा कैलरी की जरूरत होती है।
अपने वजन को बढ़ने से रोकने की सबसे बेहतर उम्र होती है 18 से 25साल। इस दौरान वजन मेंटेन किया तो आगे आसानी से नहीं बढ़ता।
* ऐसा भोजन हो जिससे प्राप्त ऊर्जा शक्ति अधिक न हो।
* पर्याप्त पोषक तत्व हो।
* चिकनाई की मात्रा कम हो।
जैसे दूध से बने पदार्थ, आइस्क्रीम या कोल्ड ड्रिंक अधिक नहीं लेना चाहिये। जैसे शराब शरीर के लिये हानिकारक है इससे प्राप्त ऊर्जा हमारे किसी काम नहीं आती परंतु व्यायाम नियमित करें क्योंकि व्यायाम करने से ऊर्जा खर्च होती हैं। भूख खुलकर लगती है आप ऐसे फल खायें, जो पेट तो भर जाये पर ऊर्जा कम दें। फल और सब्जियों से ऊर्जा कम मिलती है लकिन विटामिन व खनिज अधिक मात्रा में मिलता
इस तरह लीजिए डाइट….
दिन की शुरुआत कभी भी कॉफी या चाय के साथ न करें। कैफीन वालीचीजें बीपी व हार्ट रेट बढ़ाती हैं। इससे शरीर में तनाव महसूस होता है ,जोकि पाचन तंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन है। हम चाय या कॉफी पीकर नींदखुलने जैसा महसूस करते हैं , उसकी असली वजह हार्ट व ब्रिदिंग रेट काबढ़ना होता है। सुबह के वक्त बॉडी रिलैक्स होती है और हार्ट व ब्रिदिंग रेटसबसे कम होता है। इस रिलैक्स को बनाए रखने के लिए वास्तविक खाने कीजरूरत होती है। चाय कॉफी से पिछले कई घंटे से भूखे सेल्स को जीरोन्यूट्रिशन मिलता है। इससे भूख मरती है और आप लंबे वक्त कर बिना महसूसकिए भूखे रहते हैं। सूरज निकलने के साथ मेटाबॉलिज्म पीक पर होता है।ऐसे में इस वक्त सबसे ज्यादा खाने की जरूरत होती है। अगर आप कुछ ठोसनहीं खाना चाहते तो फल खा सकते हैं। इसके एक घंटे बाद फाइबर युक्तचीजें खाएं , जैसे रोटी - सब्जी , उपमा , इडली , पोहा आदि लेना चाहिए।एक बार सेल्स को न्यूट्रिशन मिल जाए तो आप चाय - कॉफी ले सकते हैं।
- हर दो घंटे में खाएं।
इससे आप मोटे नहीं होंगे , बल्कि खाने की मात्रा कमहोगी। ऐसे में एक वक्त में आप कम कैलरी लेंगे। ये कैलरी बेहतर तरीके सेइस्तेमाल होंगी और शरीर में जमा नहीं होंगी। थोड़े - थोड़े अंतराल पर खानेसे बॉडी को बेहतर महसूस होता है।
ज्यादा ऐक्टिव हों तो ज्यादा खाएं और कम एक्टिव हों तो कम।
अगर खुदको भूखे रखना सजा है तो ज्यादा खाना अपराध। बिना यह ध्यान दिए किहमारे पेट को क्या जरूरत है , हम खाते जाते हैं। हम मोटे इसलिए होते हैं ,क्योंकि हम सही वक्त पर खाने के बजाय गलत वक्त पर खाते हैं। उदाहरण केलिए लड्डू में काफी कैलरी होती है और अगर लड्डू खाने के साथ या रात मेंखाएं तो उन्हें कैलरी के रूप में शरीर में जमा होने से कोई नहीं रोक सकता।भरे पेट ( खाने के बाद ) और मेटाबॉलिक रेट कम होने के बाद ( सूर्यास्त केबाद ) शरीर पोषक न्यूट्रिएंट लेना बंद कर देता है। एक अच्छी औरतनावरहित नींद भी फैट कम करने में मदद करती है। सही तरीका यह है किरात में 6: 30 बजे तक पूरा खाना और 8: 30 बजे तक हल्का खाना खा लें।स्ट्रेस टाइम , बीमारी और ट्रैवल के वक्त ज्यादा कैलरी की जरूरत होती है।
अपने वजन को बढ़ने से रोकने की सबसे बेहतर उम्र होती है 18 से 25साल। इस दौरान वजन मेंटेन किया तो आगे आसानी से नहीं बढ़ता।
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