Sunday, March 27, 2011

किडनी के बारे में जानें

किडनी का दिल से सीधा  कनेक्शन है ऐसा हार्ट केयर फांउडेशन के अध्यक्ष डॉ .के.के अग्रवाल का कहनाना है . किडनी यदि स्वस्थ है तो दिल की बीमारी से भी दूर रहेंगे.साल में कमसे कम एक या दो बार तो किडनी  टेस्ट अवश्य करायें ताकि किडनी की बीमारी का समय रहते पता चल जाये और इलाज हो जाये कारण इसकी बीमारी का जितनी जल्दी पता लग जाये इलाज उतनी ही आसान होगा.गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड टेस्ट से पता चल जाता है
गुर्दे की पथरी कैसे बनती है- (सबसे आम बीमारी किडनी की) रोजाना भोजन करते समय उनमें जो कैल्शियम फॉस्फेट आदि तत्व रह जाते हैं, पाचन क्रिया की विकृति से इन तत्वों का पाचन नहीं हो पाता है। वे गुर्दे में एकत्र होते रहते हैं। कैल्शियम, फॉस्फेट के सूक्ष्म कण तो मूत्र द्वारा निकलते रहते हैं, जो कण नहीं निकल पाते वे एक दूसरे से मिलकर पथरी का निर्माण करने लगते हैं। पथरी बड़ी होकर मूत्र नली में पहुंचकर मूत्र अवरोध करने लगती है। तब तीव्र पीड़ा होती है। रोगी तड़पने लगता है। इलाज में देर होने से मूत्र के साथ रक्त भी आने लगता है जिससे काफी पीड़ा होती है।

घरेलू उपाय
  • मूली के 100 ग्राम रस में मिश्री मिलाकर बासी मुंह पीने से गुर्दे का दर्द ठीक होता है व पथरी कट-कट कर निकलने लगती है।
  • तुलसी की पत्तियां, अजवाइन 10-10 ग्राम, 5 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर, कूट पीस प्रतिदिन प्रातः 2-2 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म जल के साथ लें।
  • 15 दाने बड़ी इलायची एक चम्मच खरबूजे का बीज 2 चम्मच मिश्री, सबको पीसकर, एक कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिये गुर्दे की पथरी गलने लगती है।
  • प्रतिदिन चौलाई का साग खाने से पथरी गलकर निकलने लगती है।
  • करेले के 20 ग्राम रस में मधु मिलाकर प्रतिदिन पीने से पथरी नष्ट होकर मूत्र के साथ निकलने लगती है।
  • खीरे का रस दिन में 2-3 बार पीने से गुर्दे की पथरी नष्ट हो जाती है।
  • प्रतिदिन जामुन खाये गुर्दे की पथरी कट कर निकलने लगती है।
  • प्रतिदिन सहजन की फल्ली खायें पथरी कटकर मूत्र के साथ निकलने लगती है।
  • 100 ग्राम नारियल पानी, 10 ग्राम पालक का रस मिलाकर पीने से दो सप्ताह में
  • पथरी नष्ट हो जाती है।
  • कच्चे पालक का रस पीने से पथरी होती ही नहीं।
  • जौ का पत्ती का रस पीने से पथरी निकल जाती है।पथरी के रोगियों को जौ से बनी रोटी खानी चाहिये। जौ का सत्तू खायें। इससे पथरी
  • पिघलने लगती है और पथरी बनती ही नहीं
सावधानियां- गुर्दे के रोगी को कुछ चीजें खाते समय सावधानी बरतनी चाहिये। जैसे दूधतथा दूध  से बनी चीजें, मख्खन, पनीर, अधिक न खायें। बीयर वाईन अधिक न लें। अचार, चटनी, अधिक न खायें। मांस, मछली, मुर्गा अधिक न खायें

कैफेन इनटेक पर कंट्रोल करें,

कैफेन इनटेक पर कंट्रोल करें, नये रिसर्चों के मुताबिक
हर ड्रिंक से हम कैफेन इनटेक करते हैं- रिपोर्ट कहती है कि हमें यह जानना चाहिये कि हम हर ड्रिंक के साथ दिन भर में कितना कैफेन इनटेक करते हैं,और कितना अमाउंट इनटेक करना चाहिये, जो हमारे लिये हेल्दी होगा।
सुबह-सुबह चाय पीकर हम अपने में चुस्ती फुर्ती मेहसूस करते हैं यदि नहीं पिया तो सारा दिन आलस,मूड खराब,सरदर्द वगैरह वगैरह——
असल में इसका सारा श्रेय कैफेन को जाता है जो उस ड्रिंक में मौजूद होता है.अब इसका मतलब यह नहीं कि आप चाय ज्यादा पयें या फिर पीना ही छोड़ दें,सिर्फ अपने कैफेन इनटेक पर कंट्रोल रखें यानि सुबह सुबह कई बार चाय न लें बल्कि इस ड्रिंक के टेस्ट का आनंद उठायें न कि इसके आदि हो जाऐ.
इसके लिये बेहतर ऑप्शन क्या है ?
सबसे पहले समझें कि बडों के लिये कैफेन 300.मि.ग्राम,की मात्रा से भी कम की जरूरत है जिससे आप सेफ हैं.यदि आप इससे ज्यादा इनटेक करते हैं तो समझ लीजिये कि दिनभर में जितनी भी ड्रिंक्स लेते हैं उसकी टोटल कितना हो जाता है जैसे चाय,कॉफी,कोल्ड़ड्रिंक,एनर्जी ड्रिंक या फिर चॉकलेट इन सब के द्वारा हमारे शरीर में जाने वाली कैफेन की मात्रा कितनी बढ जाती है और यही  बढी हुई मात्रा हमारे लिये नुकसान दायक हो सकती है जैसा कि हमने उपर बताया है।अपने कैफेन इनटेक पर कंट्रोल करें।

जितनी बार चाहें आप चाय पियें यह ठीक नहीं, कारण शरीर में कैफेन की मात्रा ज्यादा हो जाने पर—-

कैफेन के फायदे तथा नुकसान दोनों ही हैं। अब यह आप पर डिपेंड करता है कि आप लिमिटेड मात्रा में लेकर इससे फायदा उठाते हैं या ज्यादा मात्रा में लेकर नुकसान उठाए
कैफीन अधिक मात्रा में इनटेक करने पर होने वाले नुकसान—
  • गैस्ट्रिक, ऐसीडिटी प्रोब्लम का सामना करना प़ड़ सकता है
  • आपकी नींद में खलल पड़ सकती है(नींद न आना)
  • ऐजिंग प्रोसेस को बढाने में इसका पूरा हाथ है(कम उम्र में ज्यादा लगना)
  • हमारी बॉडी के विटामिन ई को एब्जार्ब करने की कैपेसिटी पर भी कैफेन का नेगेटिव इफेक्ट पड़ता है इससे धीरे धीरे हमारी स्किन का कलर भी डार्क होने लगता है।
  • कॉफी का सेवन गर्भावस्था में कम ही करना चाहिये। परंतु एक आधा कप कॉफी ले सकती  है।
  • एक कप कॉफी का असर 6से8 घंटे तक रहता है इस कारण दिन भर में दो कप कॉफी तो आप पी ही सकते हैं परंतु फायदे के चक्कर में इससे अधिक नहीं।
  • इस्तेमाल की गई कॉफी को पौधों में डालें इससे उनमें कीडे नहीं लगेंगें।
  • चाय हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गई है, मगर फिर भी हम इसे कभी-कभी खास बनाते हैं। यही चाय जब हर्बल टी का रूप ले लेती है तो वह हमारी सेहत के लिये अच्छी साबित होती है।
  • वजन घटाने में मदद करती है अगर यही कॉफी की मात्रा बढा दी जाये तो ये हमारी नींद को हराम कर देगी।पेट में गड़बडी़ या फिर बेचैनी का कारण  भी बन सकती है।
इसके लिये बेहतर ऑप्शन क्या है ?
1.सबसे पहले समझें कि बडों के लिये कैफेन 300.मि.ग्राम,की मात्रा से भी कम की जरूरत है जिससे आप सेफ हैं.यदि आप इससे ज्यादा इनटेक करते हैं तो समझ लीजिये कि दिनभर में जितनी भी ड्रिंक्स लेते हैं उसकी टोटल कितना हो जाता है जैसे चाय,कॉफी,कोल्ड़ड्रिंक,एनर्जीड्रिंक या फिर चॉकलेट इन सब के द्वारा हमारे शरीर में जाने वाली कैफेन की मात्रा कितनी बढ जाती है और यही  बढी हुई मात्रा हमारे लिये नुकसान दायक हो सकती है जैसा कि हमने उपर बताया है।अपने कैफेन इनटेक पर कंट्रोल करें।
धीरे धीरे हेल्दी टी की ओर रूख करें जैसे ग्रीन टी, हर्बल टी, जिंजर टी, तुलसी टी, कारण यह बढिया एंटीऑक्सिडेंट की तरह काम करती है,हमारी बॉडी के मेटबॉलिक रेट को बढाती है।
हरी चाय -पीकर आप अपने पर एक तरह का उपकार करेंगें।सूर्यकी अल्ट्रावायलेट किरणें तथा पर्यावरण में मौजूद कैमिकल त्वचा की कोशिकाओं की संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं जिससे कम  उम्र में भी तथा असमय झुर्रियों की वजह से बुढापे की झलक दिखाता है जिसे चाय में मौजूद एंटीओक्सीडेंट सूर्यकी अल्ट्रावायलेट किरणों के कुप्रभाव को कम करती है त्वचा को जवान रखने में मदद करती है ।टीबैग या फिर बिना दूध की चाय पियें ।गरम पानी तीन चार मिनट के लिये हरी चाय या टी बैग डालकर छोड़ देंफिर
क़ॉफी हो या चाय बात इनमें होने वाली कैफेन की है
उचित मात्रा में लिये जाने वाले कैफेन के फायदे भी हैं
  • कॉफी में पाये जानेवाले मैग्नीशम हमारे मेटाबॉलिज्म ,  हड्डियों   का विकास तथा मांसपेशियों में होनेवाले संकुचन व प्रसरण में अहम भूमिका निभाते  है।
  • कॉफी में जो कैफीन होता  है वो वास्तव में याददाश्त बढ़ाती है, स्मृति से जुड़ी तंत्रिका कोशिकाओं के भागों को बढ़ाकर कैफीन तंत्रिका तंत्र में कैल्शियम स्तर में वृद्धि करती है, जो भूली बिसरी बातों को याद दिलाने में मदद करती है।
  • कॉफी कार्यक्षमता(वर्क स्पीड़) को बढ़ाने में मदद करती है।
  • वैज्ञानिक एक अरसे से कॉफी पर अध्ययन करते आ रहे है उनका मत है कि कॉफी के कई फायदे हैं।कॉफी दमे के मरीजों के लिये फायदे मंद है। ये दमे के तीव्र प्रभाव को कम करती है।
  • यदि आप किसी काम में व्यस्त हैं, तो दो कप कॉफी आपकी एकाग्रता को बनाये रखती है।
  • यदि भोजन के बाद कॉफी लेते हैं, तो आपका आलस और नींद दूर भगाती है। आपके मूड को भी अच्छा बना देती है।
  • रात की शिफ्ट  में काम करने वालों के लिये कॉफी बूस्टर का काम करती है। रात की शिफ्ट में कार्य करने वालों की कार्य क्षमता को बढ़ाती है।
हैल्दी चाय

चाय  कई तरह से गुणकारी बनाई जा सकता है..
  • हर्बल टी- चाय में अदरक, इलायची, लौंग काली मिर्च जैसी चीजें डाल दी जाय तो चाय के गुण सौ गुणा बढ़ जाते हैं।
  • अश्वगंधा टी- कहते हैं अगर कोई चाय में अश्वगंधा डालकर चाय इस्तेमाल करें तो आपमें हार्स पावर जैसी शक्ति आ जाती है। शारीरिक, मानसिक क्षमता बढ़ती है। तनाव से मुक्ति मिलती है। स्मरण शक्ति बढ़ती है। ब्रेन ट्यूमर में फायदेमंद है।
  • मुलेठी टी- चाय बनाते समय अदरक इलायची का प्रयोग तो आप करते ही हैं उसी तरह मुलेठी पीसकर उसे चाय के साथ उबालें सर्दियों में ये बहुत फायदेमंद है आवाज में निखार आता है। गले की खराश ठीक होती है। अल्सर व लिवर जैसी समस्याओं में लाभप्रद है।
  • दिन में दो कप चाय ओवेरियन कैंसर से बचाती है।
  • तीन चार कप हमें स्किन कैंसर से बचाती है।
  • आर्थराटिस रोगी के लिये ग्रीन टी फायदेमंद है।
  • चाय में पाये जाने वाले पपॉलीफिनॉल्स खून में कॉलेस्ट्राल के स्तर को कम करने में मदद करता है।
  • जरूरत से ज्यादा कोई भी चीज नुकसान करती है।
  • हरी चाय पीकर आप अपने पर एक तरह का उपकार करेंगें।सूर्यकी अल्ट्रावायलेट किरणें तथा पर्यावरण में मौजूद कैमिकल त्वचा की कोशिकाओं की संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं जिससे कम  उम्र में भी तथा असमय झुर्रियों की वजह से बुढापे की झलक दिखाता है जिसे चाय में मौजूद एंटीओक्सीडेंट सूर्यकी अल्ट्रावायलेट किरणों के कुप्रभाव को कम करती है त्वचा को जवान रखने में मदद करती है ।टीबैग या फिर बिना दूध की चाय पियें ।गरम पानी तीन चार मिनट के लिये हरी चाय या टी बैग डालकर छोड़ देंफिर
  • तुलसी चाय सिर्फ स्वाद के लिए, मूड बनाने के लिए पीने वाली चाय जैसा स्वाद और सुगन्ध देने वाली नहीं होती।
  • किसी भी प्रकार की हानि किए बिना स्वास्थ्य की रक्षा करने वाली, दिमागी शक्ति बढ़ाने वाली, रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाकर रोगों से बचाने वाली, स्फूर्तिदायक, पाचन शक्ति बढ़ाने वाली और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाली यह ‘तुलसी की चाय’ अत्यन्त लाभ करने वाली है।जरा सा दूध डालकर पियें इससे त्वचा जवान बनी रहेगी
  • तुलसी  की चाय बनाकर पीएं आपके बदन में ताजगी की लहरें दौड़ने लगेंगी। घर में अगर चाय की पत्ती की जगह तुलसी दल (पत्ती डंडी बीज)सुखाकर रख लें तो कफ, सर्दी, जुकाम, थकान और बुखार या सिर-दर्द पास भी नहीं फटकेंगे
  • प्रदूषण के साथ ही दिनचर्या व खानपान का अव्यवस्थित होना मुख्य रूप से फेफड़ों से संबंधित रोगों के कारण है। बिना किसी पूर्व योजना के बने फ्लैट्स और मकानों में खुली हवा के न होने से भी फेफड़े रोगग्रस्त होते हैं
  • यदि जुकाम के साथ बुखार भी हो तो चाय के अलावा तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर दिन में चार बार सेवन करें। जुकाम के कारण होने वाला ज्वर शान्त हो जाएगा
  • दालचीनीं, सोंठ और छोटी इलायची, कुल एक ग्राम, तुलसी-दल, छह ग्राम, इन्हें पीसकर चाय बनाएं और पीएं। दिन में ऐसी चाय चार बार भी ले सकते हैं। उस रात पेट भरकर खाना न खाएंअगली सुबह आराम आ जाएगा
नोट-जरूरत से ज्यादा कोई भी चीज नुकसान करती है ध्यान दें—कम उम्र(टीन एजर्स) को कैफेन फ्री ड्रिंक्स ही लेना चाहिये।

मेथी गुणों की खान है

मेथी गुणों की खान है, चाहे हरी ताजी हो या सूखी मेथी दाना हो……..
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मेथी दाने हो या हरी मेथी में फॉस्फेट, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर आदि पोषक तत्व पाये जाते हैं। मेथी में प्रोटीन की मात्रा भी बहुत अधिक होती है। यह हमारे भूख को भी बढ़ाती है।
  • मेथी हमें बेहतर स्वास्थ्य के साथ सौंदर्य भी प्रदान करती है। हमारी सुंदरता व स्वास्थ्य दोनों का संबंध हमारे उदर (पेट) से होता है।पेट की गड़बडि़यों से त्वचा पर फुंसियाँ निकलना, त्वचा की कांति का छिन जाना, एसीडिटी आदि समस्याएँ पैदा होती हैं।
  • मेथी एक ऐसी गुणकारी औषधि है, जो हमारे पेट संबंधी विकारों को दूर कर त्वचाको सौंदर्यता प्रदान करती है व स्वस्थ शरीर प्रदान करती है।
  • अपच, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, साइटिका आदि बिमारियों में मेथी के बीजों का का सेवन करना  बहुत ही फायदेमंद होता है।सुबह बासी मुंह एक चम्म्च मेथीदाना पानी के साथ निगल लें.
  • मेथी घरेलू उपचार के प्रयोगों में अत्यधिक महत्व रखती है। किसी साधारण रोग मे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, परंतु गंभीर बीमारी में डॉक्टर के परामर्श से ही लें।
  • मेथी के चूर्ण तथा काढ़े(चाय) से कई पेट के रोगों में आश्चर्यजनक लाभ होता है।
  • मेथी चाय- मेथी के दानों को रात भर पानी में भिगायें। सुबह मसल कर आंच पर रख दें, चाय की तरह उबालें। फिर थोड़ा गुड़ व दूध मिला कर पियें। ऊपर बतायी गयी  मेथी दाने की चाय  पीने से आंतों की सफाई होती है। मेथी दाने एसीडिटी के इलाज में फायदेमंद है।रोज सुबह दाने पानी से फांके।
  • मेथी का चूर्ण बना कर रख लें। इसे सूखा रोग, बहुमूत्र, अतिसार, पथरी, बुखार, पेचिश, रक्तचाप, मानसिक तनाव इन सब में इस्तेमाल करने से लाभ होता है।
  • मुंह के छाले -मेथी के साग (पत्ते) के अर्क से गरारे करें, मुंह के छाले ठीक होंगे। -
  • इसका पेस्ट आंखों के नीचे लगाने से कालापन दूर होगा।
  • सांस की बदबू आती हो, तो मेथी के दाने को पानी में डाल कर उबालें फिर गरारे करें।
  • बालों के लिए बालों -मेथी दानों को रात में भिगो दें, सुबह पेस्ट बनायें, फिर आधे घंटे के लिए बालों पर लगायें। फिर  सुविधानुसार, शिकाकाई आंवले से सिर धोयें, रूसी और खुश्की दूर होगी। मधुमेह के रोगी रोज सुबह दो चम्मच मेथी  पानी से लें।
  • जहां तक संभव हो, मेथी से सब्जियों में तड़का दें। मेथी में मौजूद तत्व दिमागी कमजोरी को दूर करने में मदद करती है। मेथी में लौह तत्व अधिक मात्रा में होता है, इसका नियमित रूप से सेवन करने पर रक्तल्पता दूर होती है तथा इसमें रक्त शुद्धिकरण का खास गुण होता है।
  • मेथी के दानें तथा पत्ते, दोनों गुणकारी होता है।
  • प्रसव व प्रजनन से होने वाले रोगों को दूर करती है।
  • प्रदर की शिकायत  होने पर मेथी दानों से बने काढ़े का सेवन करें।
  • गुणकारी मेथी को आज ही से हम अपने भोजन में शामिल करें और स्वस्थ शरीर तथा सुंदर  त्वचा प्राप्त करें

पपीता बहार

सामग्री: पपीता - 2पके हुए संतरा - 1बड़ा छिला हुआ केला - 1 छोटा कटा हुआ किवी - 1 छीलकर कटी हुई स्ट्राबेरी और ब्लूबेरी - 50 ग्राम दही - 50 ग्राम शहद - 50 ग्राम पुदीना - 1बड़ा चम्मच, ताजा बारीक कटा हुआ

विधि: पपीते को लंबाई से बीच में से आधा काट लें और सारे बीज निकाल दें। संतरा, केला, किवी और बेरी पपीते के आधे कटे भाग में रखें। दही, शहद और पुदीना एक बाउल में मिला लें। चम्मच की सहायता से इस मिश्रण को इन फलों पर डालें और ठंडा करके परोसें।

खरबूजा के गुण

गर्मी के इस मौसम में अपने शरीर में पानी की कमी को दूर करने के लिए खरबूजा  का सेवन एक बेहतर विकल्प है। यह फल न केवल आपकी प्यास बुझाता है, बल्कि शरीर में पानी की उचित मात्रा को भी हमेशा बनाए रखते हैं। पोषण की दृष्टि से खरबूजा  में खनिज लवण और विटामिन भले ही कम मात्रा में पाए जाते हैं, लेकिन इस फल का 95 प्रतिशत से अधिक भाग पानी होता है।

इनके खाने से गर्मी में हमारी प्यास बुझती है और शरीर में पानी की कमी उत्पन्न नहीं हो पाती। इनसे तरह-तरह के स्क्वैश, शरबत, जूस, जेली व जैम तैयार किए जाते हैं। सलाद, आइसक्रीम और मिल्क शेक में भी इसे मिलाकर खाया जाता है। अक्सर मिठाइयों में बादाम और पिस्ते के स्थान पर खरबूजा  के छिलके उतरे बीज का उपयोग किया जाता है। खरबूजे का उपयोग एक्जिमा जैसी बीमारी के लिए बहुत लाभकारी है। इसके बीज में प्रोटीन और तेल काफी मात्रा में होती है।

प्लास्टिक से दूरी बनाये रखने में ही भलाई है

प्लास्टिक से दूरी बनाये रखने में ही भलाई है,वैसे तो प्लास्टिक किसी भी तरह से इस्तेमाल करना स्वास्थ के लिये ठीक नहीं है। जैसे फ्रिज में बोतल में पानी रखना या माइक्रोवेव में खाना गरम करना.
कांच का बर्तन बेहतर होगा
यदि आपको फ्रिज में पानी रखना हो तो कांच.स्टील.तांबा की बोतल,जग या बर्तन में रखें कारण  प्लास्टिक में डाइऑक्सिन नामक केमिकल होता है  जो फ्रिज में पानी रखने से रिलीज होती है जो हमारे सेल्स के लिये बहुत हानिकारक होता है.यही नहीं इससे कैंसर होने के चांसेस भी हो सकते हैं।
यदि आप किसी भी प्लास्टिक के बर्तन में माइक्रोवेव में खाना गरम करते हैं खासकर कोई फैट वाला भोजन जैसे घी तेल से बना या मीठा आइटमहै  तो फैट, हाइहीट तथा प्लास्टिक मिलकर डाइऑक्सिन रिलीज होती है।इसलिये खास तौर पर फैट फूड प्लास्टिक बर्तन में न गरम करें.
इसका दूसरा हल हम बताते हैं-
1.पानी स्टोर करने के लिये कांच,तांबा,स्टील का बर्तन या बोतल यूस करें,सबसे अच्छा कांच होगा
2.खाना गर्म करने के लिये सिरेमिक बर्तन,या माइक्रोवेव में यूस करने वाला कांच का बर्तन यूस करें

इस तरह छोटी छोटी बातों को ध्यान  में रख कर आप कई बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं.

किडनी के बारे में जानें

किडनी का दिल से सीधा  कनेक्शन है ऐसा हार्ट केयर फांउडेशन के अध्यक्ष डॉ .के.के अग्रवाल का कहनाना है . किडनी यदि स्वस्थ है तो दिल की बीमारी से भी दूर रहेंगे.साल में कमसे कम एक या दो बार तो किडनी  टेस्ट अवश्य करायें ताकि किडनी की बीमारी का समय रहते पता चल जाये और इलाज हो जाये कारण इसकी बीमारी का जितनी जल्दी पता लग जाये इलाज उतनी ही आसान होगा.गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड टेस्ट से पता चल जाता है
गुर्दे की पथरी कैसे बनती है- (सबसे आम बीमारी किडनी की) रोजाना भोजन करते समय उनमें जो कैल्शियम फॉस्फेट आदि तत्व रह जाते हैं, पाचन क्रिया की विकृति से इन तत्वों का पाचन नहीं हो पाता है। वे गुर्दे में एकत्र होते रहते हैं। कैल्शियम, फॉस्फेट के सूक्ष्म कण तो मूत्र द्वारा निकलते रहते हैं, जो कण नहीं निकल पाते वे एक दूसरे से मिलकर पथरी का निर्माण करने लगते हैं। पथरी बड़ी होकर मूत्र नली में पहुंचकर मूत्र अवरोध करने लगती है। तब तीव्र पीड़ा होती है। रोगी तड़पने लगता है। इलाज में देर होने से मूत्र के साथ रक्त भी आने लगता है जिससे काफी पीड़ा होती है।
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घरेलू उपाय
  • मूली के 100 ग्राम रस में मिश्री मिलाकर बासी मुंह पीने से गुर्दे का दर्द ठीक होता है व पथरी कट-कट कर निकलने लगती है।
  • तुलसी की पत्तियां, अजवाइन 10-10 ग्राम, 5 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर, कूट पीस प्रतिदिन प्रातः 2-2 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म जल के साथ लें।
  • 15 दाने बड़ी इलायची एक चम्मच खरबूजे का बीज 2 चम्मच मिश्री, सबको पीसकर, एक कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिये गुर्दे की पथरी गलने लगती है।
  • प्रतिदिन चौलाई का साग खाने से पथरी गलकर निकलने लगती है।
  • करेले के 20 ग्राम रस में मधु मिलाकर प्रतिदिन पीने से पथरी नष्ट होकर मूत्र के साथ निकलने लगती है।
  • खीरे का रस दिन में 2-3 बार पीने से गुर्दे की पथरी नष्ट हो जाती है।
  • प्रतिदिन जामुन खाये गुर्दे की पथरी कट कर निकलने लगती है।
  • प्रतिदिन सहजन की फल्ली खायें पथरी कटकर मूत्र के साथ निकलने लगती है।
  • 100 ग्राम नारियल पानी, 10 ग्राम पालक का रस मिलाकर पीने से दो सप्ताह में
  • पथरी नष्ट हो जाती है।
  • कच्चे पालक का रस पीने से पथरी होती ही नहीं।
  • जौ का पत्ती का रस पीने से पथरी निकल जाती है।पथरी के रोगियों को जौ से बनी रोटी खानी चाहिये। जौ का सत्तू खायें। इससे पथरी
  • पिघलने लगती है और पथरी बनती ही नहीं

सावधानियां- गुर्दे के रोगी को कुछ चीजें खाते समय सावधानी बरतनी चाहिये। जैसे दूधतथा दूध  से बनी चीजें, मख्खन, पनीर, अधिक न खायें। बीयर वाईन अधिक न लें। अचार, चटनी, अधिक न खायें। मांस, मछली, मुर्गा अधिक न खायें